“Varanasi me ghumne ki jagah –वाराणसी में घूमने की 10 प्रसिद्ध जगहें, जो आपको जरूर देखनी चाहिए

Varanasi me ghumne ki jagah: भगवान शिव की नगरी वाराणसी (काशी) उत्तर प्रदेश राज्य का एक पवित्र शहर है, जो प्राचीन काल से हिन्दू धर्मावलम्बियों के लिए आध्यात्मिक केंद्र रूप में अवस्थित है। वाराणसी शहर भारत ही नही विश्व की प्राचीन शहरों में से एक है। इस शहर का इतिहास 3,000 सालों से भी ज्यादा पुराना है। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार वाराणसी यानि काशी भगवान शिव का निवास स्थान है। काशी को मोक्ष की नगरी भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि काशी का अस्तित्व कभी मिट नही सकता, चाहे कितने भी युग क्यों ना बदल जाएं। हर साल लाखो पर्यटक देश और विदेश से काशी दर्शन के लिए आते है। यहाँ पर कई सारे धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थल हैं, जो पर्यटकों और तीर्थ यात्रियों के मन को मोहित कर देते है।

आज के इस आर्टिकल में आप वाराणसी स्थित मंदिरों का अद्भूत एवं अनोखा अनुभव प्राप्त कर सकते है। अगर आप भी काशी के मंदिरों का दर्शन करने का प्लान बना रहें है, तो यह आर्टिकल आपके लिए बेहद मददगार साबित होगा। तो चलिए शुरू करते है पवित्र काशी की यात्रा।  

वाराणसी में घूमने की जगहें: एक परिचय –Varanasi me ghumne ki jagah

1. विश्वनाथ मंदिर:

"Varanasi me ghumne ki jagah –वाराणसी में घूमने की 10 प्रसिद्ध जगहें, जो आपको जरूर देखनी चाहिए
Varanasi me ghumne ki jagah

वाराणसी में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर जिसे वाराणसी का हृदय स्थल माना जाता है, हिन्दू धर्म के सबसे पवित्र और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। पवित्र गंगा नदी के तट पर स्थित भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है। इस मंदिर को “मोक्ष का द्वार” भी कहा जाता है, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि यहाँ दर्शन करने मात्र से आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। इस मंदिर का इतिहास काफी पुराना है, विदेशी आक्रमणकारियों ने अनेकों बार इस मंदिर नष्ट करने की कोशिश की लेकिन हर बार इसे पुन:र्जीवित किया गया। वर्त्तमान में मंदिर का जो स्वरुप है, उसे 18वीं शताब्दी में मराठा महारानी अहिल्याबाई होलकर ने बनवाया था। यह मंदिर भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक और वास्तुकला का अद्भूत उदहारण प्रस्तुत करता है।

इस मंदिर का शिखर, जो सोने के मढ़ा हुआ है, बेहद आकर्षक है। यहाँ की मंगला आरती, भोग आरती और संध्या आरती बेहद प्रसिद्ध है। हर साल लाखो श्रद्धालु भगवान शिव के अलौकिक रूप का दर्शन करने यहाँ आते है। सावन के महीने और शिवरात्रि के समय यहाँ भक्तजनों की काफी भीड़ रहती है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के बन जाने के बाद श्रद्धालुओं को गंगा स्नान करके मंदिर तक पहुँचने में काफी सहूलियत हो गई है।

2. दशाश्वमेध घाट (Dashashwamedh Ghat)

Varanasi me ghumne ki jagah
Varanasi me ghumne ki jagah

वाराणसी का दशाश्वमेध घाट (Dashashwamedh Ghat) गंगा नदी के तट पर स्थित 84 घाटों में सबसे ऐतिहासिक और फेमस है। दशाश्वमेध दो शब्दों दश और अश्वमेध के मेल से बना है, जिसका तात्पर्य दस अश्वमेध यज्ञों से है। ऐसी मान्यता है, की भगवान श्री राम के पिता अयोध्या के राजा श्री दशरथ ने इसी घाट पर अश्वमेध यज्ञ किया था। वर्तमान में इस घाट का रख रखाव का काम वाराणसी नागर निगम के द्वारा किया जाता है।

इस घाट पर प्रत्येक दिन लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान और पूजा अर्चना करने के लिए आते है। ऐसा माना जाता है कि गंगा नदी में स्नान करने मात्र से ही इंसान अपने किये हुए पापों से मुक्त हो जाता है। इस घाट का मुख्य आकर्षण संध्या में होने वाली गंगा आरती है। आरती के समय जलते असंख्य दीये और मंत्रो की गूँज श्रद्धालुओं को आत्म विभोर कर देती है।

3. मणिकर्णिका घाट (Manikarnika Ghaat)

Varanasi me ghumne ki jagah
Varanasi me ghumne ki jagah

मणिकर्णिका घाट वाराणसी स्थित 84 घाटों में सबसे पवित्र माना जाता है। इस घाट पर साल भर 24 घंटे दाह संस्कार होता रहता है। हिन्दू धर्म में इस घाट को मोक्ष प्राप्ति स्थल के रूप में जाना जाता है। ऐसी मान्यता है की यहाँ पर जिस किसी का भी दाह संस्कार होता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। लाखों लोग अपने अंतिम समय में वाराणसी जाते है, ताकि अपनी ज़िन्दगी की अंतिम सांस भगवान शिव की इस पावन स्थल पर ले सके। फिर उसके बाद उनका अंतिम संस्कार यानि दाह संस्कार वाराणसी के पवित्र मणिकर्णिका घाट पर हो सके।  

इस घाट के आस-पास कई सारे मंदिर भी है, जहाँ आप दर्शन कर सकते है। चुंकि इस घाट पर हर समय चिताएं जलती रहती है, इसलिए अकारण यहाँ नही जाना चाहिए। यहाँ पर कई सारे तांत्रिक तंत्र-मंत्र की क्रिया करते रहते है, जिससे इस स्थान के वातावरण में नाकारात्मक उर्जा का संचार होता रहता है, जो आपको हानि पहुंचा सकती है।

इसे भी पढ़े : Vrindavan Tour 2025 : जाने वृन्दावन में घूमने की जगह, खर्च और जाने का सही समय

4. अस्सी घाट (Assi Ghaat)

Varanasi me ghumne ki jagah
Varanasi me ghumne ki jagah

अस्सी घाट (Assi Ghaat) वाराणसी के महत्त्वपूर्ण एवं प्राचीन घाटों में से एक है। इसे “सुबह-ए-बनारस (बनारस यानि वाराणसी की सुबह) के नाम से भी संबोधित किया जाता है जो वाराणसी की सुबह के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक सार को दर्शाता है  पौराणिक कथा के अनुसार, शुंभ-निशुंभ राक्षस का वध करने के बाद, देवी दुर्गा ने अपनी तलवार अस्सी नदी में फेंक दी थी। गंगा और अस्सी नदियों के संगम के निकट स्थित होने के कारण, इस स्थान का नाम अस्सी घाट पड़ा। यह घाट हिंदू धर्मावलम्बियों के बेहद खास है। इस घाट पर गंगा में पवित्र स्नान करने के बाद, तीर्थयात्री पीपल के पेड़ के नीचे स्थित विशाल शिवलिंग की पूजा करते हैं। इस घाट के पास स्थित संगमरमर के मंदिर में एक और शिवलिंग है, जिसे असीसंगमेश्वर लिंगम के नाम से जाना जाता है।

ऐसी मान्यता है कि महान संत और कवि गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस का अवधि भाषा में रुपान्तरण इसी अस्सी घाट पर किया था और अपनी अंतिम सांस भी यही पर ली थी। इस घाट पर आयोजित होने वाली संध्या आरती एक अद्भूत अनुभूति प्रदान करती है। मकर संक्रांति पर मनाये जाने वाले पर्व देव दीपावली (देवताओं की दीवाली) पर यह घाट हजारों मिट्टी के दीये से जगमगा उठता है। गंगा दशहरा और गंगा महोत्सव: गंगा के पृथ्वी पर अवतरण का उत्सव मनाने वाले इन त्योहारों पर विशेष पूजा, आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें अस्सी घाट की प्रमुख भूमिका होती है।

5. काल भैरव मंदिर (Kaal Bhairav Temple)

Varanasi me ghumne ki jagah
Varanasi me ghumne ki jagah

वाराणसी के प्रसिद्ध, रहस्यमय और शक्तिशाली मंदिरों में से एक, काल भैरव मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। काल भैरव को काशी का कोतवाल माना जाता है, जो वाराणसी आने वाले भक्तों के संकट को दूर करते है। ऐसी मान्यता है कि बिना इनकी अनुमति के कोई भी इंसान वाराणसी में ना तो निवास कर सकता है और ना ही प्रवेश कर सकता है। भक्तों की ऐसी भी मान्यता है कि इनके दर्शन मात्र से सभी प्रकार के डर दूर जाते है और नकारात्मक शक्तियां कभी भी पास नही आती है। बिना इनके दर्शन और आशीर्वाद के वाराणसी की यात्रा अधूरी मानी जाती है। मंदिर की वास्तुकला बेहद खूबसूरत है। मंदिर के गर्भगृह में काल भैरव की मूर्ती स्थापित है। काले पत्थर से बनी हुई इस मूर्ती को खोपड़ियों की माला से सजी हुई और हाथ में त्रिशूल एवं डमरू लिए हुए दिखाया गया है। वैसे तो यहाँ हमेशा भक्तों की भीड़ लगी रहती है, लेकिन रविवार और मंगलवार बहुत ही ज्यादा भक्त यहाँ आते है।

6. सारनाथ (Sarnath)

Varanasi me ghumne ki jagah
Varanasi me ghumne ki jagah

वाराणसी के पास गंगा और वरुण नदियों के तट पर स्थित सारनाथ एक बेहद ऐतिहासिक और पवित्र स्थल है यही पर भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी, जिसके बाद उन्होंने पहली बार पूरे विश्व को शांति का ज्ञान दिया था, जो धर्मचक्र परिवर्तन के नाम से इतिहास में दर्ज है। यह स्थल बौद्ध धर्मावलम्बियों के बेहद पवित्र है। देश-विदेश से पर्यटक बौद्ध धर्म के इतिहास, कला और आध्यात्मिकता के अध्ययन के लिए यहाँ आते है।

इसे भी पढ़े : Radha Rani Mandir Barsana : जाने प्रेम और भक्ति के प्रतीक बरसाना की 7 फेमस जगहें

7. तुलसी मानस मंदिर (Tulsi Manas Temple)

Varanasi me ghumne ki jagah
Varanasi me ghumne ki jagah

तुलसी मानस मंदिर महाकाल की नगरी कही जाने वाली वाराणसी (काशी) का एक प्रसिद्ध और अत्यंत पवित्र मंदिर है। इस मंदिर को तुलसी मानस बिरला मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। भगवान राम को समर्पित इस मंदिर का निर्माण उस स्थान पर माना जाता है, जहाँ महाकवि गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना की थी। सफेद संगमरमर से निर्मित इस मंदिर का निर्माण 1964 कोलकाता के व्यापारी सेठ रतन लाल सुरेका के द्वारा करवाया गया था, जिसका उद्घाटन तत्कालीन राष्ट्रपति महामहिम सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने किया था। इस मंदिर के दीवारों पर रामायण के प्रसंगों को चित्रों के माध्यम से दिखाया गया है। इसके अलावे मंदिर की दीवारों पर रामचरितमानस की चौपाई भी लिखी हुई है, जो देखने में अत्यंत सुंदर लगता है। मंदिर में समय-समय पर श्री राम एवं कृष्ण लीला का आयोजन होता रहता है। मंदिर का वातावरण बेहद शांत है जो मन को भाव-बिभोर कर देता है।

8. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (Banaras Hindu University (BHU)

Varanasi me ghumne ki jagah
Varanasi me ghumne ki jagah

भारत के सबसे बड़े आवासीय विश्वविद्यालयों में से एक बनारस हिंदू विश्वविद्यालय सिर्फ एक शैक्षणिक संस्थान ही नही, बल्कि वाराणसी का सांस्कृतिक लैंडमार्क भी है। वर्ष 1916 में निर्मित इस विश्वविद्यालय की स्थापना पंडित मदन मोहन मालवीय ने की थी। लगभग 1300 एकड़ में फैले हुए इस विश्वविद्यालय परिसर में 4 शोध संस्थान, 14 कॉलेज और 150 से अधिक विभाग है। देश ही नही विदेश से भी हजारों छात्र-छात्राएं विविध प्रकार के शोध कार्यों के लिए यहाँ आते रहते है। विश्वविद्यालय की वास्तुकला भी बेहद खूबसूरत है साथ ही साथ यहाँ का शांत वातावरण भी मन को सकून देता है।    

9. रामनगर किला (Ramnagar Fort)

Varanasi me ghumne ki jagah

वाराणसी के गंगा नदी के तट पर स्थित रामनगर का किला एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर है, जो मुगल और राजपूताना स्थापत्य कला का बेहद खूबसूरत उदहारण है। इस किले का निर्माण 17वीं शताब्दी में काशी नरेश वंश के प्रथम शासक महाराजा बलवंत सिंह ने बनवाया था। इस किले की वास्तुकला बेहद खूबसूरत है जिसमें मुगलकालीन और राजपूताना शैली का छाप दिखता है। इस किले में चार मुख्य द्वार है, दर्शनी द्वार, लाहौरी द्वार, गणेश द्वार और सराय द्वार। इस किले में एक संग्रहालय भी है जिसमें प्राचीन और दुर्लभ वस्तुओं का संग्रह किया गया है, जो प्राचीन काल के राजशाही जीवनशैली को दर्शाता है। यहाँ आप सोमवार और सार्वजनिक छुट्टी को छोड़ कर कभी भी सुबह के 10 बजे से शाम के 5 बजे तक घूम सकते है।

10. संकट मोचन मंदिर (Sankat Mochan Mandir)

Varanasi me ghumne ki jagah
Varanasi me ghumne ki jagah

वाराणसी स्थित संकट मोचन मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है। संकट’ का मतलब ‘खतरा’ और ‘मोचन’ का मतलब ‘हटाने वाला’ होता है, इसलिए संकटमोचन मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है, जिन्हें भक्तों के संकट दूर करने वाला माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि संकट मोचन मंदिर के दर्शन के बिना वाराणसी की यात्रा अधूरी रह जाती है। अस्सी घाट के पास स्थित यह मंदिर वाराणसी के प्राचीन हिंदू मंदिरों में से एक है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार इस प्रसिद्ध धार्मिक स्थल के दर्शन से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूरी हो जाती हैं। ऐसा भी मान्यता है की यह मंदिर उसी स्थान पर बना हिया जहाँ गोस्वामी तुलसीदास जी को भगवान हनुमान के दर्शन हुए थे। इस मंदिर को बनवाने का श्रेय बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय को जाता है। आम तौर पर शनिवार और मंगलवार भगवान के दिन माने जाते हैं। दूसरे दिनों की तुलना में दोनों दिन भक्त मंदिर में बड़ी संख्या में आते हैं। लोग भगवान हनुमान के सामने सुंदरकांड, हनुमान मंत्र, हनुमान चालीसा, हनुमान आरती, हनुमान अष्टक और बजरंग बाण का जाप करते हैं।

वाराणसी कैसे पहुँचें (How to reach Varanasi)

काशी यानि वाराणसी देश का एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्र है, जहाँ देश ही नही विदेशो से भी लाखों श्रद्धालु आते रहते है। वाराणसी पहुँचने के लिए आप रेल मार्ग, हवाई मार्ग एवं सड़क मार्ग में से किसी का भी चुनाव कर सकते है।

रेलमार्ग से वाराणसी कैसे पहुँचें (By Road)

वाराणसी शहर का मुख्य रेलवे स्टेशन वाराणसी जंक्शन है, जो देश के लगभग सभी बड़े एवं फेमस शहरों से सीधे जुड़ा हुआ है। यह स्टेशन शहर से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर है। यहाँ से आप वाराणसी के किसी भी स्थान की यात्रा आसानी से कर सकते है। यात्रा के लिए आप अपनी सुविधा एवं बजट के अनुरूप ऑटो या कैब कर सकते है।

हवाई मार्ग से वाराणसी कैसे पहुँचें (By Flight)

वाराणसी से निकटतम एयरपोर्ट लाल बहादुर शाश्त्री इंटरनेशनल एयपोर्ट है, जो शहर के केंद्र बिन्दू से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहाँ से देश के सभी बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बैंगलोर, कोलकाता, हैदराबाद शहरो के लिए सीधी फ्लाइट की सुविधा उपलब्ध है। इंटरनेशनल एअरपोर्ट होने के कारण यहाँ से दुबई, शारजाह, काठमांडू जैसे कई देशों के लिए सीधी उड़ान सेवा उपलब्ध है। एअरपोर्ट से वाराणसी घूमने के लिए आपको आसानी से कैब मिल जाएंगे।

सड़क मार्ग से वाराणसी कैसे पहुँचें (By Road)

वाराणसी आप सड़क मार्ग से भी आसानी से पहुँच सकते है। यह शहर राष्ट्रीय राजमार्ग 19 और 31 से सीधे जुड़ा हुआ है। वाराणसी के लिए देश के प्रमुख्य शहरों से सरकारी और प्राइवेट बसें भी उपलब्ध है। इसके अलावे आप टैक्सी से भी यात्रा कर सकते है। आप अनपी सुविधा एवं बजट के अनुसार बस या कैब का चुनाव कर सकते है।

अंत में,

दोस्तों, आपको मेरी द्वारा दी गयी जानकारी कैसी लगी अगर अच्छी लगी हो तो प्लीज अपने उन दोस्तों को जरुर शेयर करें जो घूमने के शौक़ीन हो ,और अपनी यात्रा के यादगार पल हमारे साथ भी शेयर करें ,Thank you !

डिस्क्लेमर : इस वेबसाइट पर उपलब्ध सभी जानकारी केवल सामान्य ज्ञान, शिक्षा और जानकारी के उद्देश्य से प्रकाशित की जाती है। हम किसी भी तरह की सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं देते।

Leave a Comment