Vrindavan Tour 2025 : जाने वृन्दावन में घूमने की जगह, खर्च और जाने का सही समय

Vrindavan Me Ghumne ki Jagah: वृन्दावन भगवान कृष्ण और राधा रानी जी की प्रेम कहानी के लिए प्रसिद्ध है। दुनिया भर में प्रसिद्ध शहर ”वृन्दावन” दो शब्दों वृंदा और वन के मेल से बना है, जिनमे ”वृंदा ” का मतलब है तुलसी, और ”वन ” का मतलब है जंगल। अर्थात “तुलसी का जंगल”, जहाँ तुलसी के पौधे अत्यधिक मात्रा में हों। वृन्दावन में कान्हा जी और श्री राधा रानी के अनेको मंदिर हैं, जो इस जगह को और भी पवित्र एवं मनमोहक बना देते हैं।

वृन्दावन उत्तरप्रदेश में यमुना नदी के तट पर मथुरा जिले में बसा एक पवित्र शहर है। यह शहर राधा-कृष्णा जी के भक्ति से सराबोर भारत के सबसे पुराने शहरों में से एक है। भगवान श्री कृष्ण का बचपन, राधा रानी और गोपियों संग रची लीलाओं और रास लीलाओं के लिए विख्यात यह शहर मथुरा से 10-11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। दिल्ली से 150-155 किलोमीटर की दूरी पर बसा यह शहर सालों भर अपने भक्तों और तीर्थयात्रियों से भरा रहता है। वृन्दावन जाने के लिए आप किसी भी मौसम गर्मी, सर्दी या बरसात कभी भी जा सकते हैं। यहाँ की ”लठ्ठमार होली” पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।

दोस्तों अगर आप वृन्दावन जाने का प्लान कर रहे हो, तो आज हम इसी टॉपिक पर आपसे चर्चा करने आये हैं, की वृंदावन कहाँ है, यहाँ की विशेषताएँ क्या है। यहाँ कैसे जाएँ, जाने में कितना खर्च आएगा और यहाँ का खानपान कैसा होगा। ये सारी जानकारी आपको आगे दी जाएगी, तो प्लीज आर्टिकल को पूरा पढ़े तो चलिए शुरू करते हैं।

Table of Contents

Vrindavan Me Ghumne ki Jagah। वृंदावन में घूमने की जगह

1. प्रेम मंदिर (Prem Temple, Vrindavan)

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अपने नाम के अनुरूप यह मंदिर श्रीकृष्ण जी और राधा रानी जी के प्रेम का प्रतिरूप माना जाता है। इस मंदिर के अंदर एक मंच का निर्माण किया गया है, जो यहाँ आने वाले भक्तों को भगवन श्री कृष्ण के जीवन को 48 पैनलों में भव्य रूप से दिखाते हैं और लोगों को आन्दमय अनुभूति देते हैं। इस मंदिर का बाहरी भाग सुन्दर-सुन्दर परिदृश्यों और बगीचे की मनमोहकता को दिखता है। यह मंदिर सुबह के 5:30 बजे से लेकर 12:00 तक और फिर शाम के ही 4:30 बजे से रात्रि के 8 बजे तक दर्शन के लिए खुला रहता है। दोपहर के 12.00 बजे से शाम के 4.30 बजे मंदिर का कपाट बंद रहता है। इस मंदिर में जाने के लिए कोई entry fees नही देनी पड़ती है।

2. बांके बिहारी मंदिर (Banke Bihari Temple, Vrindavan)

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वृन्दावन रेलवे स्टेशन से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित श्री बांके बिहारी जी का मंदिर है, जो पूरी तरह राजस्थानी शैली में नक्काशी किया गया है। यह मंदिर भगवान श्री कृष्ण जी के बाल स्वरूप को दर्शाता है। इस मंदिर में रखी गयी मूर्ति बहुत पुरानी है और काले रंग की है। सन 1863 तक इस मूर्ति को निधिवन में ही रखा गया था और पूजा भी वहीं होती थी। इस मंदिर में श्री कृष्ण जी मूर्ति के सामने पर्दे लगे हुए है जो कुछ-कुछ देर पर गिरा दिए जाते है ऐसी मान्यता है कि यदि कोई भी भक्त श्री कृष्ण जी की मूर्ति का दर्शन लगातार कुछ देर तक करता रह जाए तो वो बेहोश हो जाएगा। इस मंदिर में एक भी घंटी नही है और ना ही यह शंखनाद होता है। क्योंकि श्री बांके बिहारी जी को शंख और घंटे की आवाज पसंद नही थी। गर्मियों में सुबह के 7.45 बजे से दोपहर के 12 बजे और शाम के 5.30 बजे से रात्रि के 9.30 बजे तक भक्त इस मंदिर में श्री बांके बिहारी का दर्शन कर सकते है।

3. निधिवन (Nidhivan)

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निधिवन मंदिर मथुरा वृन्दावन के मंदिरों में से एक अद्भुत, पवित्र और रहस्यमयी स्थलों में से एक है, जहाँ आकर एक अद्भुत और अद्वितीय अनुभूति होती है। बांके बिहारी जी मंदिर से 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित निधिवन भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी जी के प्रेम लीलाओं का प्रतीक है। मान्यता है कि रात के समय निधिवन में भगवान श्री कृष्ण राधा रानी और गोपियों संग रास लीला रचाते है, और यही कारण है की यहाँ कोई भी रात के समय में नही रुक सकता है। इसी निधिवन में एक ”रंग महल” भी है, जहाँ रात्रि में भगवान कृष्ण जी और राधा रानी जी विश्राम करते हैं। निधिवन में जाने के लिए कोई भी entry fees नही लगता है, और यहाँ पूरे दिन में किसी भी समय घूमने के लिए जा सकते हैं। लेकिन शाम होने के बाद यहाँ कोई भी नही जाता और entry रोक दी जाती है।

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4. श्री रंगनाथ मंदिर (Sri Ranganath Temple)

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श्री रंगनाथ मंदिर भगवान विष्णु जी को समर्पित है, जहाँ के खम्भे सिर्फ सोने के ही बने हुए है। श्री रंगनाथ मंदिर 1851 में स्थापित दक्षिण भारतीय शैली में बनी हुई अत्यंत आकर्षक और मनमोहक है। इस मंदिर का वातावरण शान्तिपूर्ण और भक्तिभाव से सराबोर है, जिसे बनाने में लगभग 40 से 45 लाख रुपयों का खर्च हुआ था। इस मंदिर में गर्भगृह तक जाने के लिए सात दरवाजे हैं, जिनमे से एक दरवाजा साल में एक बार ”बैकुंठ एकादशी ” के दिन ही खुलता है जिसे ”स्वर्ग का दरवाजा” भी कहा जाता है। इस मंदिर में शीश महल भी है, जिसे देखने के लिए कुछ पैसे(entry fees) देने होते हैं। यह मंदिर सुबह 5:30 से लेकर दोपहर के 12 बजे तक और शाम में 4 बजे से लेकर रात्रिके 9 बजे तक दर्शन के लिए खुला रहता है। यहाँ पर दर्शन के लिए कोई भी entry fees नही देनी पड़ती है।

5. नन्द महल गोकुल (Nand Mahal Gokul, Vrindavan)

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नंद महल भगवान श्री कृष्ण के भक्तों के लिए बहुत ही पवित्र और आस्था का केंद्र है। भक्तजन भगवन श्री कृष्ण के बाल्यकाल से जुड़ी उनकी लीलाओं का स्मरण करने के लिए यहाँ आते है। ऐसी मान्यता है की यह मंदिर उसी जगह पर स्थित है, जहाँ उनके पिता नंद बाबा का घर था। यह महल प्राचीन शैली में बनी हुई है। इसमें भगवन श्री कृष्ण, राधा रानी, बलराम नंद बाबा और माता यशोदा जी की मूर्तियाँ स्थापित है। महल की दीवारों पर श्री कृष्ण के बचपन से जुड़ी लीलाओं का चित्र अंकित है।

6. श्री जुगल किशोर जी मंदिर (Jugal Kishore Temple, Vrindavan) 

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वृंदावन में स्थित प्रमुख मंदिरों में से एक श्री जुगल किशोर मंदिर भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है। यह मंदिर वैष्णव संप्रदाय को समर्पित है, जहाँ श्री कृष्ण जी की पूजा जुगल किशोर के रूप में की जाती है। जुगल किशोर का अर्थ होता है युगल स्वरुप यानि राधा और कृष्ण। इस मंदिर का निर्माण 17वीं शताब्दी में मुग़ल सम्राट अकबर के शासन काल के दौरान हुआ था जन्माष्टमी के दौरान यहाँ भक्तों का तांता लगा रहता है।

7. पगला बाबा मंदिर (Pagal Baba Temple)

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पगला बाबा मंदिर वृंदावन के खूबसूरत और फेमस मंदिरों में से एक है। वास्तव में यह मंदिर श्री श्यामदास जी महाराज का समाधी स्थल है। श्री श्यामदास जी हर वक्त प्रभु श्री कृष्ण की भक्ति में लीन रहते थे, जिस कारण लोगों ने उन्हें पगला बाबा की उपाधि से संबोधित करने लगे थे। 11 मंजिले सफेद संगमरमर से बने इस मंदिर की ऊचाई 221 फीट है, जहाँ से वृंदावन की खूबसूरती को आसानी से देखा जा सकता है। मंदिर के भूतल में पूरे साल कठपुतली का अनोखा प्रदर्शन चलता रहता है, जिसमें कठपुतलीयों के माध्यम से रामायण और महाभारत जैसे पौराणिक ग्रंथो का प्रदर्शन किया जाता है। यहाँ आने वाले श्रद्धालु इस प्रदर्शन को देख कर भाव-विभोर हो जाते है।

8. श्री राधा मदन मोहन मंदिर (Madan Mohan Temple, Vrindavan)

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वृंदावन में घूमने की जगह

श्री राधा मदन मोहन मंदिर वृंदावन के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है, जो लाल बलुआ पत्थर से अंडाकार आकार में बनी हुई है एवं वास्तुकला की नागर शैली से प्रभावित है। इस मंदिर का निर्माण 16वीं सदी में संत श्री सनातन गोस्वामी जी के द्वारा करवाया गया था। इस मंदिर में भगवान श्री कृष्ण की पूजा मदन मोहन के रूप में की जाती है।

9. शाह जी मंदिर (Shahji Temple, Vrindavan)

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शाह जी मंदिर जिसे छोटे राधा रमण के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर अपनी अनोखी वास्तुकला और सुंदरता के लिए फेमस है। इस मंदिर का निर्माण 19वीं सदी में एक व्यापरी श्री शाह कुंदन लाल ने करवाया था, जो भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है। सफेद संगमरमर से बने इस मंदिर का मुख्य आकर्षण 12 सर्पिल स्तंभ है, जो सर्प के आकर में मुड़े हुए है। मंदिर में भगवान श्री कृष्ण के जीवन से जुड़ी चित्र अंकित है जो भक्तों को मनमोहित कर देता है।

10. केसी घाट (Keshi Ghat, Vrindavan)

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वृन्दावन के प्रसिध्द धार्मिक स्थानों में से एक केसी घाट यमुना नदी के तट पर बसा है और इसके बारे में मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण जी ने इसी केसी घाट पे केशी नाम की राक्षसी का वध किया था और स्नान भी किया था। इसलिए इसका नाम केशी घाट पड़ा था। केशी घाट का निर्माण भरतपुर की रानी लक्ष्मी देवी ने 17वीं शताब्दी में करवाया था। इस घाट पर बहुत सारे मंदिर बने हुए हैं, जो 24 घंटे खुले रहते हैं। यहाँ प्रतिदिन यमुना जी के घाट पर संध्या आरती होती है, और पर्यटकों के लिय बोटिंग़ (boating) की भी व्यस्था है, जहाँ आप चाहे तो नौकायान कर सकते हैं। यहाँ boating के लिए कुछ पेमेंट भी करना पड़ता है।

11. कुसुम सरोवर (Kusum Sarovar, Vrindavan)

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वृन्दावन में एक तालाब जिसे कुसुम सरोवर कहा जाता है। इसका नाम भगवान श्री कृष्ण जी और राधा रानी जी के लिए फूल लाने वाली लड़की के नाम पर रखा गया है। मान्यताओं के अनुसार भगवान श्री कृष्ण जी और उनके सारे मित्र इसी कुसुम सरोवर के पानी में खेला करते थे। कुसुम सरोवर का निर्माण बुंदेला के राजा वीर सिंह जी ने 17वीं सदी में करवाया था। लेकिन इसका जीर्णोद्धार राजा सूरजमल ने किया था। कुसुम सरोवर एक बहुत ही सुन्दर और शान्तिप्रद झील है, जो राधा कुंड और गोवर्धन पर्वत के बीच में स्थित है। कुसुम सरोवर 24 घंटे खुला रहता है और यहाँ घूमने के लिए कोई entry fees भी नही लगता है।

12. श्री गोविन्द देव मंदिर (Shri Govind Dev, Vrindavan)

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वृन्दावन में स्थित श्री गोविन्द देव जी मंदिर लाल बालूशाही पत्थर से बना हुआ वो मंदिर है, जिसके बारे में मान्यता है कि इसी शहर में भगवान श्री कृष्ण जी का बचपन बीता था। इस मंदिर में कोइ entry fees नही लगता है,और यहाँ दर्शन के लिय सुबह के 9 बजे से लेकर रात के 9 बजे तक जाया जा सकता है।

13. गोवर्धन पहाड़ी (Govardhan Hill, Vrindavan)

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वृन्दावन घूमने जाने वालों के लिए गोवर्धन पर्वत या गिरिराज पर्वत एक ऐसा प्राचीन मंदिर है, जो भगवान श्री कृष्ण जी की लीलाओं से जुड़ा हुआ है। कहावत है की देवराज इन्द्र के प्रकोप से गोकुल वासियों को बचाने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने इस पर्वत को अपनी तर्जनी उंगली पे उठाया था। इस पर्वत के चारों ओर कई प्राचीन मंदिर है और इसकी लम्बाई-चौड़ाई इतनी ज्यादा है कि इसकी परिक्रमा करने में कुल 21 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है। जिसे पूरा करने में कम से कम 6-7 घंटे लगते हैं। यहाँ परिक्रमा करने के लिए आप पैदल चलकर या रिक्शे में भी जा सकते हैं। इस परिक्रमा के मध्य में राधा कुंड, श्यामा कुंड, दान घाटी मंदिर, कुसुम सरोवर, ऋणमोचन, मुखारबिंद और पुचारी स्थल शामिल है।

14. निकुंज वन (Nikunj Forest, Vrindavan)

वृन्दावन में निकुंज वन या सेवा कुंज वह पवित्र बगीचा है, जहाँ भगवान श्री कृष्ण जी ने श्री राधारानी जी और गोपियों के साथ रासलीला रचायी थी। इसीलिए मान्यता यह भी है कि यह स्थान भगवान श्री कृष्ण जी के ह्रदय के अति करीब है,और इसलिए यहाँ का वातावरण पूरी तरह शांत, अध्यात्मिक और मनोरम प्रतीत होता है। यहाँ तरह-तरह के पेड़ पौधे लगे हुए हैं, जो काफी प्राचीन है। ये पेड़-पौधें अपनी खुशबू से आपके मन को मोह लेंगे और एक अलग सी ताजगी से आपको भर देंगे। यहाँ राधा और कृष्ण जी की एक मनमोहक और सुन्दर मूर्ति है। यहाँ एक कुंड भी है जिसे ललिता कुंड कहा जाता है। यह मंदिर सुबह के 11 बजे से लेकर शाम के 5:30 बजे तक खुला रहता है। यहाँ जाने के लिए कोई entry fees नही लगती है।

15. राधा दामोदर मंदिर (Radha Damodar Temple, Vrindavan)

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वृन्रादावन का राधा दामोदर मंदिर लगभग 500 वर्ष पुराना है। गौड़ीय वैष्णव परंपरा के एक प्रमुख व्यक्ति श्रील जीवा गोस्वामी द्वारा स्थापित किया गया भगवान श्री कृष्ण जी का यह मंदिर 16वीं शताब्दी में बनाया गया था। इस मंदिर के बारे में कहावत है, कि सनातन गोस्वामी नित्य गिरिराज की परिक्रमा करते थे। जब वे वृद्धावस्था में असमर्थ हो गये तो भगवान कृष्ण ने एक बच्चे के रूप में प्रकट हो कर उन्हें डेढ़ हाथ लम्बी काले रंग की वट पत्रकार शिला उन्हें लाकर दी थी। जिसपे भगवान के चरण चिन्ह के साथ गाय के पैरों के खुर्भी बने हुए हैं। भगवान कृष्ण जी ने गोस्वामी जी को आदेश दिया की अब वह वृद्धावस्था में गिरिराज पर्वत के बजाए इसी शिला की परिक्रमा कर लें। उनके देह त्याग के बाद शिला को इसी मंदिर में स्थापित कर दिया गया है, और अब श्रद्धालु इसी मंदिर की चार परिक्रमा कर लेते हैं। मान्यता यह भी है कि इसकी सिर्फ चार परिक्रमा कर लेने से गोवर्धन पर्वत की परिकर्मा का पुण्य प्राप्त हो जाता है। यह मंदिर सुबह और शाम में खुलता है लेकिन दोपहर में बंद रहता है। यहाँ श्री कृष्ण जन्माष्टमी, श्री राधा अष्टमी, गोवर्धन पूजा, कार्तिक मास और पुरूषोतम मास आदि को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।

16. इस्कॉन मंदिर (ISKCON Temple, Vrindavan)

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इस्कॉन मंदिर वृन्दावन रेलवे स्टेशन से 2 किलोमीटर की दूरी पर इस्कॉन मंदिर को श्री कृष्ण बलराम मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह भारत के प्रमुख मंदिरों में से एक है। इस मंदिर की स्थापना 1975 में रामनवमी के दिन हुई थी। इस मंदिर की नींव स्वामी प्रभुपाद ने रखी थी। वर्ष 1975 में उनकी मृत्यु के बाद उनकी समाधि इस मंदिर के सामने ही बनाई गयी थी। इस्कॉन मंदिर सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक और शाम 4 बजे से रात 8:30 बजे तज खुला रहता है। स्वामी प्रभुपाद जी के घर को ही संग्रहालय में कन्वर्ट करके गोशाला, एक गेस्ट हाउस, गुरुकुल और रेस्तरां भी बनाया गया है। इस मंदिर में जाने के लिए कोई भी entry fees नही लगती है।

17. यमुना नदी (Yamuna River, Vrindavan)

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यमुना नदी और वृन्दावन सुनकर ऐसा लगता है की दोनों नाम एक दूसरे के पूरक है। वृंदावन शहर यमुना नदी के किनारे बसा हुआ है। इस नदी से भगवान श्री कृष्ण का बहुत गहरा संबंध था। उनका पूरा बचपन इसी नदी के तट पर बीता था। इस कारण उनके भक्त वृंदावन भ्रमण के दौरान इस नदी को देखना नही भूलते है। शरद पूर्णिमा, देवउठनी एकादशी जैसे धार्मिक अवसरों पर श्रद्धालु यमुना के किनारे विशेष पूजा पाठ करते है।

वृन्दावन की विशेषताएँ क्या है या वृन्दावन किस लिए प्रसिद्ध है?

  • वृन्दावन के बारे में कहा जाता है की इसकी खोज भगवान श्री कृष्ण के अनन्य भक्त चैतन्य महाप्रभु ने सन 1515 में की थी।
  • पुराणों के अनुसार मान्यता है की वृन्दावन में भगवान श्री कृष्ण का साक्षात शरीर विद्धमान है,और इसीलिए यह पृथ्वी का सबसे उत्तम भाग है।
  • यहाँ का निधिवन एक ऐसी जगह के रूप में विख्यात है, जहाँ भगवान श्री कृष्ण ने राधा रानी जी के साथ विश्राम किया था और यहाँ रात्रि में कोई भी नही रुक सकता। मान्यता यह भी है कि निधिवन में प्रत्येक रात्रि को भगवान श्री कृष्ण जी के लिय बिस्तर, पान और दातून जैसी चीजें रखी जाती है,और सुबह में यह सारे सामान अस्त-व्यस्त अवस्था में मिलते हैं जैसे की भगवान ने इन सबका उपयोग किया हो।
  • वृन्दावन की लठ्ठमार होली देश ही नही विदेशों में भी प्रसिद्ध है। यहाँ लोग विदेशों से होली खेलने और देखने आते हैं।
  • वृन्दावन में भगवान बांके बिहारी (भगवान श्री कृष्ण) जी की मूर्ति की आँखें इतनी खूबसूरत, मनमोहक और चमत्कारिक है की इसके कारण उनके दर्शन होते ही मन में सांसारिक जीवन नीरस लगने लगता है और संसार त्यागने की इक्छा जागृत होने लगती है। इसी वजह से मंदिर में दर्शन के समय वहाँ लगे परदे को बार-बार खोला और बंद किया जाता है, जिससे लोगों का ध्यान थोड़ा भटक जाए और वे ज्यादा सम्मोहित न हो।
  • भगवान श्री कृष्ण जी ने यहाँ राधा रानी और गोपियों संग जहाँ रासलीला की थी उस जगह को “सेवा कुंज ” के नाम से जाना जाता है।
  • वृन्दावन शहर के अन्दर लगभग 4000 से लेकर 5000 तक छोटे-बड़े मंदिर स्थपित है। जिसमे प्रेम मंदिर, बांके बिहारी मंदिर, द्वारकाधीश मंदिर, इस्कॉन मंदिर जैसे अनगिनत मंदिर है।
  • वृन्दावन जाने के लिए आप किसी भी मौसम में चाहे गर्मी हो या सर्दी या फिर बरसात, कभी भी जा सकते हैं। यहाँ का मौसम उत्तर भारत के मौसम के अनुकूल होता है। कोई विशेष मौसम की समस्या नही होती है।

वृंदावन कैसे पहुंचे How to reach Vrindavan?

वृंदावन उत्तरप्रदेश राज्य का एक बहुत ही पवित्र शहर है। इसे शहर में भगवान श्री का बचपन बिता था। सालो भर कृष्ण भक्त इस शहर में भ्रमण के आते रहते है, इस लिए आप हवाई मार्ग, सड़क मार्ग या रेल मार्ग सेआसानी से पहुँच सकते है।

ट्रेन से यात्रा (By Train)

वृंदावन जाने के लिए आप किसी भी राज्य से जा सकते हैं और इन सब जगहों, राज्यों और शहरों से वृंदावन जाने के लिए ट्रेन उपलब्ध है। वृंदावन में स्थित रेलवे स्टेशन से लंबी दूरी की सीधी ट्रेन सेवा उपलब्ध नही है। यहाँ से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन मथुरा है, जहाँ से वृंदावन की दूरी 11 किलोमीटर है। मथुरा रेलवे स्टेशन से वृंदावन पहुचने के लिए आपको लोकल ट्रेन, ऑटो या टैक्सी मिलेगी आप अपने बजट के अनुसार इन विकल्पों में से किसी एक का चुनाव कर सकते है। ट्रेन से जाने के लिए आप IRCTC से अपनी टिकेट बुक कर सकते हैं।

हवाई मार्ग (By Air)

वृंदावन पहुँचने के लिए निकटम हवाई अड्डा आगरा शहर में अवस्थित है, जो वृंदावन से लगभग 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आगरा से हवाई अड्डा से आप बस या टैक्सी से आसानी से वृंदावन पहुच सकते है। आगरा हवाई अड्डा देश के लगभग सभी हवाई अड्डों से जुड़ा हुआ है।

सड़क मार्ग से (By Road)

आप सड़क मार्ग से देश के किसी भी राज्य से आसानी से वृंदावन पहुँच सकते है। वृंदावन से लगभग 10 किलोमीटर कि दूरी पर स्थित मथुरा शहर देश के सभी राज्यमार्गो से सीधा जुड़ा हुआ है। यहाँ से आपको ऑटो, टैक्सी, लोकल बस आसानी से वृंदावन पहुँचने के लिए मिल जाएंगे। वृंदावन पहुंचे के लिए देश के लगभग सभी बड़े शहरों जैसे दिल्ली, पटना, चंडीगढ़, जयपुर, लखनऊ, गोरखपुर से सरकारी बस के अलावे निजी कंपनी के लग्जरी बसे भी उपलब्ध है। आप अपनी बजट के अनुरूप इन बसों का चुनाव कर सकते है।

वृंदावन घूमने का सही समय क्या है? Right Time to Visit Vrindavan

वैसे तो कृष्ण भक्त सालो भर वृंदावन का भ्रमण करते रहते है, लेकिन घूमने के लिए सबसे सही समय अक्टूबर से मार्च है। जनवरी और फरवरी के दौरान मौसम थोड़ा सर्द रहता है। तापमान 5 डिग्री से 15 डिग्री के बीच रहता है, लेकिन ऐसे मौसम में घूमने का अपना एक अलग ही आनंद है। अप्रैल से जून के दौरान मौसम बहुत ज्यादा गर्म रहता है तापमान 30 डिग्री से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है, जिस कारण घूमने में काफी परेशानी का सामना करना पर सकता है।

वृंदावन में कहाँ ठहरे Where to stay in Vrindavan

वृंदावन में हर वर्ष लाखो कृष्ण भक्त आते है। ऐसे में उनके ठहरने के लिए यहाँ कई प्रकार की जगहें जैसे : मंदिरों के गेस्ट हाउस, धर्मशाला, होटल्स, लॉज, बुटिक होटेल्स, रिसॉर्ट उपलब्ध है। इनमे सभी प्रकार किस सुविधाएं उपलब्ध होती है। अगर आपका बजट कम है तो आप वृंदावन गेस्ट हाउस या बालाजी गेस्ट में ठहर सकते है। कुछ धर्म गुरुओं के आश्रम भी है, जहाँ आप फ्री में रह सकते है। इन आश्रमों में आराम करने लायक सभी सुविधाएं उपलब्ध होती है।

वृंदावन का फेमस भोजन Famous food of Vrindavan

जैसा की अभी तक आपने जाना की वृंदावन एक पवित्र और धार्मिक नगरी है, इसलिए यहाँ बिना लहसून-प्याज वाले शुद्ध शाकाहारी भोजन ही मिलते है। सुबह-सुबह नाश्ते के लिए आपको यहाँ के फेमस आलू-पूड़ी और कचौरी सब्जी हर जगह उपलब्ध मिलेंगे। पेड़े, मालपुआ, मलाईदार रबड़ी, मीठा श्रीखंड, पानीपुरी, बेसन टिक्की और आलू टिक्की यहाँ के फेमस भोजन है। आप जब भी वृंदावन आए तो इनका सेवन करना ना भूलें। 

वृंदावन घूमने का खर्चा Cost of visiting Vrindavan

वैसे तो कहीं भी घूमने का खर्चा आपके ठहरने की जगह, खाने-पीने की आदते, आपके द्वारा की जाने वाली गतिविधियों पर निर्भर करता है। फिर भी वृंदावन घूमने में औसतन 2500-3000 रूपये प्रति व्यक्ति प्रति दिन खर्च करने पर सकते है, जिनमें रहना, भोजन, लोकल विजिट, सम्मलित है।  

अंत में,

आज के इस आर्टिकल में  आपने वृंदावन में घूमने की जगह के बारे में विस्तार से जाना। आशा करती हूँ की आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा। अगर आर्टिकल अच्छा लगे तो अपने दोस्तों एवं अपने सोशल मीडिया पर शेयर जरुर करें।  अगर आप इस आर्टिकल से जुड़े कोई भी सुझाव देना चाहते है तो कमेंट करके जरुर बताएं। 

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